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Dhat Rog ka ilaj—Dhatu girna ke lakshan aur —धातु रोग के प्रभावी आयुर्वेदिक नुस्खे

By Hakeem: Suhail, Established 1935

धात गिरने को ही घातु रोग कहते है, धातु रोग का अर्थ होता है के व्यक्ति के वीर्य का मूत्र के साथ निकल जाना, इसे ही धात रोग कहते है! धातु के गिरने को शुक्र-मेह ( Dhatu girne ko Shukrameh bhi kahte hai) भी कहा जाता है! जब भी किसी पुरुष के मन में काम या सेक्स की भावना बढ जाती है! तो लिंग अपने आप ही कड़ा हो जाता है और उसका अंग उत्तेजना की अवस्था में आ जाता है! इस अवस्था में व्यक्ति के लिंग से पानी के रंग के जैसी पतली लेस के रूप में निकलने लगती है! लेस बहूत कम होने के कारण ये लिंग से बाहर नहीं आ पाती है, लेकिन जब व्यक्ति काफी अधिक देर तक उत्तेजित रहता है तो ये लेस लिंग के मुहँ के आगे आ जाती है!

Dhatu Rog Aur Ling Ki Kamjori Ka Ilaj

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धात रोग की पहचान और धात रोकने का इलाज

लार जैसा सफेद तरल पदार्थ पेशाब और शौच करते समय निकलता है इसे ही धात कहते हैं। वीर्य पुरुष के शरीर की बहुमूल्य पदार्थ है। अनियमित रुप से पुरुष की इच्छा शक्ति के विरुद्ध जब वीर्य अधिक मात्रा में शरीर से बाहर निकलता है तो इससे पुरुष के शरीर में जल्दी कमजोरी आने लगती है। और उसे कई प्रकार की बीमारी होने लगती है।

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