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धात रोग क्या है

What is Discharge Weakness

धात गिरने के कारण और लक्षण

Dr. Suhail: Jameel Shafakhana

अगर धात रोग को सीधे सीधे समझाएं तो व्यक्ति के मूत्र मेंवीर्यका भी अपने आप निकल जाना धात रोग कहलाता है. धातु के गिरने को शुक्रमेह भी कहा जाता है. किन्तु ये होता क्यों है? इस बात को समझना भी आसान है. मतलब जब किसी पुरुष के मन में काम भावना बढती है तो उसका लिंग सख्त और उत्तेजित अवस्था में आ जाता है. इस अवस्था में पुरुष के लिंग से पानी के रंग के जैसी थोड़ी सी पतली लेस निकलने लगती है. ये लेस इतनी अधिक कम होती है कि ये लिंग से बाहर नहीं आ पाती, लेकिन लिंग के अधिक देर तक उत्तेजित रहने से उसके मुहँ के आगे आ जाती है और इसी को मजी ( Prostatic Secretion ) भी कहा जाता है.

आजकल ऐसे अनेक युवक और युवती है जो गलत तरीके से अपनेवीर्यको बर्बाद करते रहते है, कुछ तो ख्यालों में ही लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना आरम्भ कर देते है. उनकी इसी ख्यालों की दुनिया में खोये रहने के कारण उनका लिंग अधिक देर तक उत्तेजित रहता है और लेस ज्यादा मात्रा में बहनी आरम्भ हो जाती है. एक समय ऐसा भी है जब इन युवकों की स्थिति अधिक खराब हो जाती है और लड़की का ख्याल मन में आते ही उनकी लेस बाहर निकल जाती है और वे शांत हो जाते है. ये एक रोग है जिसे लालामेह ( शुक्रमेह ) कहते है.

धात रोग के कारण ( Causes of Discharge Weakness )

धात रोग के लक्षण ( Symptoms of Discharge Weakness ) :

धात दुर्बलता क्या है ?

धात दुर्बलता इस रोग में धातु क्षीणता के कारण व्यक्ति जल्दी स्खलित हो जाता है| ऐसे रोगी का वीर्य पतला होता है| इसके शिश्न में बहुत कम उत्थान हो पाता है| धातु दुर्बलता से छुटकारा पाने के लिए कामोत्तेजक खाद्य पदार्थों- लहसुन, मांस, मदिरा, चाय, कॉफी, अधिक मिर्च-मसाले वाली वस्तुएं आदि का उपयोग तत्काल कम कर देना चाहिए| कारण अत्यधिक चिन्ता, शोक, मानसिक अशान्ति आदि कारणों से मनुष्य के शरीर में धातु या वीर्य क्षीण हो जाता है| इसके अलावा दिमागी कमजोरी, पौष्टिक भोजन, फल, दूध, मेवा आदि की कमी के फलस्वरूप व्यक्ति के शरीर के मांस, मेद, अस्थि, मज्जा आदि उचित मात्रा में नहीं बन पाते| अन्त में यही वीर्य की कमजोरी का कारण बन जाते हैं| पहचान धातु या वीर्य दुर्बलता के कारण शारीरिक और मानसिक कमजोरी दिखाई देने लगती है| शरीर में तरह-तरह के रोग पैदा हो जाते हैं| इसके साथ-साथ उदासी, आलस्य, अंगों का कांपना, थकावट, अप्रसन्नता, काम में मन न लगना, पेट के रोग, स्नायु दुर्बलता, श्वास, खांसी, शिश्न में कमजोरी आदि लक्षण मालूम पड़ते हैं|

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